संतो की सरकार को दो टूंक: राम मंदिर के लिए बने कानून, नहीं तो शुरू होगी कार सेवा

संतो की सरकार को दो टूंक: राम मंदिर के लिए बने कानून, नहीं तो शुरू होगी कार सेवा

नई दिल्ली। दिल्ली में हुई विश्व हिन्दू परिषद के सन्त उच्चाधिकार समिति की बैठक में संतो ने मोदी सरकार से कानून बनाकर राम मंदिर बनाने की मांग की। इतना ही नहीं संतों ने बैठक के बाद राष्ट्रपति से भी मुलाकात की और उनसे सरकार को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की।

बैठक में संतों ने संतों ने कहा कि केंद्र सरकार 31 जनवरी तक मंदिर निर्माण का रास्ता तलाशे। इसके अलावा संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने के लिए दबाव बनाने का फैसला लिया। संतों ने आगाह किया कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर का निर्माण नहीं होता है, तो केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा चुनाव हार सकती है।

राष्ट्रपति को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि महामहिम केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार को कहें कि वह कानून बनाकर राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करे। महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि राष्ट्रपति ने आश्वासान दिया कि वह इस मामले में उचित कदम उठायेंगे।

संतों ने कहा कि वे अक्तूबर माह में सभी राज्यों के राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन देंगे। नवंबर में सांसदों को राम मंदिर पर कानून के लिए उनका घेराव करेंगे। दिसंबर में मंदिर, मठों, गुरुद्वारों में बैठके होंगी और अगर संसद में कानून नहीं बना, तो कारसेवा शुरू होगी।

संतों ने कहा कि कोर्ट में लंबित एससी/एसटी एक्ट पर केंद्र सरकार संसद से कानून बना सकती है, तीन तलाक बिल पर अध्यादेश ला सकती है, तो राम मंदिर के निर्माण के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता. बैठक में देश भर के 40 प्रमुख संत शामिल हुए।

संतो ने कहा कि सरकार के समय में गोरक्षा का कानून बने, धारा 370 हटे, समान नागरिक संहिता का कानून बने और लेकिन अभी श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण प्राथमिकता है, अब कोई देरी में इसमें स्वीकार नहीं है।

वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि 31 जनवरी और 1 फरवरी को इलाहाबाद कुंभ में धर्म संसद होगी जिसमें 30 हजार संत शामिल होंगे। अध्यादेश न आने पर वहीं आगे की रणनीति तय करेंगे।

उन्होंने कहा कि हमने कोर्ट के फैसले का इंतजार सितंबर तक किया है लेकिन अब देर हो रही है। वहीं इशारों में राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ‘जनेऊधारी’ भी हमारा समर्थन करें।

स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि रामजन्म भूमि इस सरकार के विमर्श से बाहर है। बीजेपी पालमपुर प्रस्ताव को याद करे। उन्होंने कहा कि राममंदिर की प्रतीक्षा करते-करते कई महापुरुष स्वर्ग सिधार गए. संत अब प्रधानमंत्री जी को बीजेपी की ओर से किए गए वादों की याद दिलायें।

गौरतलब है कि 1989 में बीजेपी ने अपनी पालमपुर की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि केंद्र में जब उनकी आयेगी तो राम मंदिर निर्माण क मार्ग प्रशस्त करेगी।

संतो ने ये भी कहा पिछले बीस साल में दो बार केंद्र में बीजेपी नेतृत्व की सरकार बन चुकी हैं लेकिन अभी राम मंदिर का मामला अभी तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा हुआ है।

TeamDigital