“कांग्रेस की दो सीट की औकात” वाला मुलायम का बयान बन रहा गठबंधन में रोड़ा !

“कांग्रेस की दो सीट की औकात” वाला मुलायम का बयान बन रहा गठबंधन में रोड़ा !

नई दिल्ली। सपा संरक्षक मुलायम सिंह द्वारा कुछ महीने पहले कांग्रेस को लेकर दिया गया बयान ही सपा बसपा गठबंधन में रोड़ा बन रहा है। सूत्रों के मुताबिक बसपा की पहले पसंद अब सपा नहीं बल्कि कांग्रेस है।

गौरतलब है कि फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा उम्मीदवारों कोई जीत के बाद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने 2019 के आम चुनावो में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने पर एतराज जताया था। मुलायम सिंह यादव यहीं ही रुके उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की औकात सिर्फ दो सीटों की है।

मुलायम सिंह यादव के इस बयान का मतलब था कि यदि कांग्रेस गठबंधन में शामिल होना चाहे तो उसे सिर्फ रायबरेली और अमेठी सीट ही दी जा सकती है। हालाँकि मुलायम के बयान पर कांग्रेस ने कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन जानकारों की माने तो कांग्रेस को मुलायम का बयान तीर की तरह चुभ गया था।

वहीँ दूसरी तरफ कैराना उपचुनाव के बाद बसपा ने गठबंधन को लेकर अपने निर्णय की समीक्षा की है। पार्टी सूत्रों की माने तो बसपा सुप्रीमो की राय में बसपा को सपा के साथ गठबंधन करने फायदा कम नुक्सान ज़्यादा है। इसलिए बसपा सुप्रीमो सीटों के बंटवारे के फैसले के बिना सपा से गठबंधन को लेकर बहुत गंभीर नहीं हैं।

सूत्रों की माने तो चूँकि सपा सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित है इसलिए बसपा राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यदि बसपा और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय स्तर पर कोई गठबंधन बनता है तो बसपा को उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी अपने उम्मीदवार लड़ाने का मौका मिलेगा।

अभी हाल ही में कर्नाटक में गठबंधन सरकार बनने के बाद बसपा के एकमात्र विधायक को मंत्रिपद दिए जाने से खुश बसपा सुप्रीमो मायावती का रुझान कांग्रेस की तरफ बढ़ा है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस और बसपा के बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में गठबंधन कर चुनाव लड़ने का खाका तैयार हो चूका है।

वहीँ सूत्रों ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में भी कांग्रेस बसपा के साथ गठजोड़ करने को लेकर गंभीर है। यदि 2019 में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के बीच गठबंधन नहीं बनता तो ऐसी स्थति में कांग्रेस और बसपा मिलकर कई राज्यों में चुनाव लड़ेंगे।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में यदि गठबंधन के लिए सपा ज़्यादा भाव दिखाती है तो रालोद, बसपा और कांग्रेस मिलाकर चुनाव लड़ेंगे। हालाँकि अभी हाल ही में सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन की खातिर कुछ सीटों की कुरबानी देने का बयान भी दिया था।

जानकारों की माने तो बसपा से गठबंधन के बिना समाजवादी पार्टी सिर्फ 8 से 10 सीटों पर ही दमखम दिखा सकती है। और यदि सपा गठबंधन से बाहर रही और बसपा, रालोद और कांग्रेस के बीच गठबंधन बना तो दलित, जाट और मुस्लिम मतदाताओं का कॉम्बिनेशन बनाकर चुनाव लड़ा जायेगा। जैसा कि रालोद ने हाल ही में कैराना में किया था।

हालाँकि कांग्रेस और सपा एक दूसरे के बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन 13 जून को कांग्रेस द्वारा दी गयी इफ़्तार पार्टी से सपा का गायब रहना इस बात का बड़ा सन्देश देती है कि सपा और कांग्रेस के बीच सम्बन्धो में खटास बढ़ रही है।

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावो के लिए समाजवादी पार्टी पहले ही अकेले दम पर सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का एलान कर चुकी है। इससे ज़ाहिर है कि सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर अलग अलग रास्ते बन चुके हैं।

TeamDigital