संघ के घर में घुसकर नसीहत, पढ़िए – संघ के कार्यक्रम में क्या बोले प्रणब मुखर्जी

संघ के घर में घुसकर नसीहत, पढ़िए – संघ के कार्यक्रम में क्या बोले प्रणब मुखर्जी

नागपुर। आरएसएस के तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इशारो इशारो में संघ को नसीहत की तथा नेहरू व गांधी का राष्ट्रवाद बताया।

अपने भाषण की शुरुआत में ही पूर्व राष्ट्रपति ने आरएसएस को परोक्ष रूप से कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि भारत की ताकत उसकी सहिष्णुता में निहित है और देश में विविधता की पूजा की जाती है।

प्रणब मुखर्जी ने संघ की हिन्दू राष्ट्र की सोच पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि देश में यदि किसी धर्म विशेष, प्रांत विशेष, नफरत और असहिष्णुता के सहारे राष्ट्रवाद को परिभाषित करने की कोशिश की जाएगी तो इससे हमारी राष्ट्रीय छवि धूमिल हो जाएगी।

उन्होंने राष्ट्रवाद को परिभाषित करते हुए कहा कि उन्हें इस मंच से राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर अपना मत रखने के लिए बुलाया गया हैं। इन तीनों शब्दों
को अलग-अलग देखना संभव नहीं है। इन शब्दों के समझने के लिए पहले हमें शब्दकोष की परिभाषा देखने की जरूरत है।

प्रणब मुखर्जी ने नेहरू और गांधी का ज़िक्र करते हुए कहा कि आधुनिक भारत की परिकल्पना कई लोगों ने की. इसका पहला अंश भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेशन इन द मेकिंग में मिलता है। इसके बाद नेहरू ने भारत एक खोज में कहा कि भारतीय राष्ट्रीयता केवल हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के मिलन से ही विकसित होगी। वहीं गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निरंतर प्रयासों से देश को 1947 में आजादी मिली. जिसके बाद सरदार पटेल की अथक मेहनत से भारत का एकीकरण किया गया।

इतिहास का उदाहरण देते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत में राज्य की शुरुआत छठी सदी में महाजनपद की अवधारणा में मिलती है। इसके बाद मौर्य, गुप्त समेत कई वंश का राज रहा और इस अवधारणा पर यह देश आगे बढ़ता रहा। इसके बाद 12वीं सदी में मुस्लिम आक्रमण के बाद से 600 वर्षों तक भारत में मुसलमानों का राज रहा। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत आई एक बहुत बड़े हिस्से पर राज किया। पहले ईस्ट इंडिया कंपनी और फिर ब्रिटिश हुकूमत ने सीधे भारत पर राज किया।

प्रणब ने कहा कि आधुनिक भारत की परिकल्पना कई लोगों ने की. इसका पहला अंश भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेशन इन द मेकिंग में मिलता है। इसके बाद नेहरू ने भारत एक खोज में कहा कि भारतीय राष्ट्रीयता केवल हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के मिलन से ही विकसित होगी।

उन्होंने कहा कि गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निरंतर प्रयासों से देश को 1947 में आजादी मिली। जिसके बाद सरदार पटेल की अथक मेहनत से भारत का एकीकरण किया गया।

संघ को नसीहत :

प्रणब मुखर्जी ने संघ के मंच से ट्रेनिंग लेने वाले शिक्षार्थियों को कहा कि वह शांति का प्रयास करें और जिन आदर्शों पर नेहरू और गांधी जैसे नेताओं ने राष्ट्र, राष्ट्रीयता और देशभक्ति की परिभाषा दी उन्हीं रास्तों पर चलते हुए देश की विविधता को एक सूत्र में पिरोने का काम करें।

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि जहां पूरी दुनिया के लिए मैगस्थनीज के विचार पर एक धर्म, एक जमीन के आधार पर राष्ट्र की परिकल्पना की गई। वहीं इससे अलग भारत में वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा आगे बढ़ी। जिसने पूरी दुनिया को एक परिवार के तौर पर देखा। प्रणब ने कहा कि भारतीय इसी विविधता के लिए जाने जाते हैं और यहां विविधता की पूजा की जाती है।

उन्होंने कहा कि कहा कि बीते कई दशकों की कोशिश के बाद आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है लेकिन हैपिनेस इंडेक्स में भारत अभी भी 133वें नंबर पर है। लिहाजा, हमारे ऊपर जो दायित्व है उसे निभाते हुए कोशिश करने की जरूरत कि जल्द से जल्द भारत हैपीनेस इंडेक्स में शीर्ष के देशों में शुमार हो।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को देश ने अपने लिए नया संविधान अंगीकृत किया। इस संविधान ने देश को एक लोकतंत्र के तौर पर आगे बढ़ाने की कवायद की। हालांकि प्रणब ने कहा कि भारत को लोकतंत्र किसी तोहफे की तरह नहीं मिला बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी के साथ लोकतंत्र के रास्ते पर पहल कदम बढ़ाया गया।

TeamDigital