दुनियाभर के 600 बुद्धजीवियों का पीएम को पत्र: कठुआ-उन्नाव पर ख़ामोशी को लेकर सवाल
नई दिल्ली। दुनिया के नामचीन 600शिक्षाविदो और बुद्धजीवियों ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखकर कठुआ और उन्नाव रेप मामले में उनकी ख़ामोशी पर सवाल उठाये हैं।
पत्र में उन्नाव और कठुआ सहित देश में हो रही बलात्कार की घटनाओं पर सख्त नाराज़गी जताई गयी है। जानकारी के अनुसार शिक्षाविदो और बुद्धजीवियों ने यह पत्र प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के नाम शनिवार को भेजा गया था।
इस पत्र पर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय , ब्राउन विश्वविद्यालय, हार्वर्ड, कोलंबिया विश्वविद्यालय और विभिन्न आईआईटी के शिक्षाविदों और विद्वानों ने हस्ताक्षर किए हैं। इस पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इंगित करते हुए साफ़ तौर पर लिखा गया है कि देश में बने गंभीर हालत पर और सत्तारूढ़ों के हिंसा से जुड़ाव के निर्विवाद संबंधों को लेकर आपने लंबी चुप्पी साध रखी है।
पत्र में कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों में जो घटनाएँ घटी हैं उनसे कई तरह के सवाल पैदा हो गये हैं। कहीं सत्तारुड़ो द्वारा हिंसा का तांडव तो कहीं रेप आरोपियों के समर्थन में सत्तारूढ़ लोगों का प्रदर्शन मनमानी किये जाने के स्पष्ट उदाहरण हैं।
गौरतलब है कि शनिवार को ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 वर्ष और उससे कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामले में दोषी पाए जाने पर मृत्युदंड सहित कड़े दंड के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दी थी।
शनिवार को बच्चियों से रेप के दोषियों को मौत की सजा देने के कानून पर सीपीएम नेता वृंदा करात ने कहा, ‘सैद्धांतिक रूप से मैं मौत की सजा के खिलाफ हूं। मौत की सजा का प्रावधान तो पहले से ही ‘रेयरिस्ट ऑफ दे रेयर’ मामलों में है। असल में मुद्दा है कि सरकार के कुछ सदस्य रेपिस्ट को बचा रहे हैं और उन रेपिस्ट रक्षकों के खिलाफ सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए।’
सीपीएम नेता और राज्यसभा सांसद वृंदा करात ने कहा कि मुद्दे को भटकाने के लिए सरकार इस अध्यादेश को लाने की कोशिश कर रही है। इसकी विश्वसनीयता को लेकर मुझे शक है। हम निश्चित सजा चाहते हैं। ये मुद्दा उन मुद्दों की बात नहीं कर रहा जो भारतीयों के दिमाग को उत्तेजित कर रहा है।
