रिज़र्व बैंक की तिमाही रिपोर्ट: नोटबंदी से बिगड़े हालातो में अब तक सुधार नहीं
नई दिल्ली। रिज़र्व बैंक की तिमाही रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में नोटबंदी से बिगड़े हालातो का असर अभी भी बाकी है।
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर, 2016 में ग्रॉस फायनेंशियल एसेट्स (सकल वित्तीय संपत्तियां) का कुल मूल्य 141 ट्रिलियन रुपये था। दिसंबर, 2016 तक इसमें चार ट्रिलियन रुपये की कमी आई और यह आंकड़ा 137 ट्रिलियन तक पहुंच गया था।
आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारतीय लोग आमतौर पर बचत करने वाले और अर्थव्यवस्था में वित्तीय संसाधन की आपूर्तिकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं। हालांकि, वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही में नेट फायनेंशियल एसेट्स में नकारात्मक बदलाव दिखा है जो नोटबंदी के प्रभाव को दर्शाता है।’
नोटबंदी के बाद हाउसहोल्ड के फायनेंशियल एसेट्स के स्वरूप में भी उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। सितंबर, 2017 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की तुलना में करेंसी होल्डिंग्स में भी गिरावट दर्ज की गई है। नोटबंदी से पहले यह जहां 10.6 फीसद था, वहीं बड़े नोटों को वापस लेने की घोषणा के बाद यह आंकड़ा 8.7 फीसद तक पहुंच गया।
करेंसी होल्डिंग में गिरावट का असर म्यूचुअल फंड में निवेश के तौर पर सामने आया। लोग करेंसी होल्डिंग का इस्तेमाल फायनेंशियल मार्केट में करने लगे।
इसके अलावा लोगों के डिस्पोजेबल इन्कम (खर्च योग्य आय) में भी कमी दर्ज की गई। इसका सीधा असर बाजार पर देखने को मिला। दूसरी तरफ, केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू बचत में तकरीबन चार फीसद की गिरावट आई है।
बता दें कि पीएम मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी। हाउसहोल्ड फायनेंशियल एसेट्स आउटस्टैंडिंग अमाउंट में भी छह फीसद तक की कमी दर्ज की गई। वर्ष 2017 की अंतिम तिमाही में भी यह आंकड़ा सितंबर, 2016 के मुकाबले कहीं कम है।
