राम जेठमलानी ने अपने 9 पृष्ठों के पत्र में पीएम मोदी को याद दिलाये ये वादे

राम जेठमलानी ने अपने 9 पृष्ठों के पत्र में पीएम मोदी को याद दिलाये ये वादे

नई दिल्ली। प्रसिद्द अधिवक्ता राम जेठमलानी एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। जेठमलानी ने पीएम नरेंद्र मोदी के नाम अपने 9 पृष्ठों के एक पत्र को अपने ब्लॉग पर साझा करते हुए कई बड़े सवाल उठाये हैं।

जेठमलानी ने पीएम मोदी को उनके वादो को याद दिलाते हुए काला धन वापस लाने और गरीब परिवारों के खाते में 15 लाख रुपये देने के वादे का उल्लेख कर कई सवाल दागे हैं।

इतना ही नहीं राम जेठमलानी ने पीएम मोदी के तीन साल के कार्यकाल पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि इन तीन सालो में आपने अपनी नाकामी के सबूत दे दिए हैं।

जेठमलानी ने यह भी कहा कि मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, आपने वादे देश की जनता से किये हैं, आप वे वादे पूरे करें जो आपने देश से किये हैं।

जेठमलानी ने अपने नौ पृष्ठों के पत्र में निम्न मुद्दों को उठाया है :

1. आप इस वादे पर चुनाव जीते थे कि 90 लाख करोड़ रुपए के बराबर का काला धन लाएंगे।

2. आपने हर गरीब परिवार के खाते में 15 लाख रुपए देने का वादा किया था।

3. संयुक्त राष्ट्र ने चार साल काम किया और साल 2004 में युनाइटेड नेशंस कनवेंशन अगेंस्ट करप्शन पेश किया जो कई देशों से चोरी किए गए काले धन से निपटने के लिए था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस पर दस्तख़त किए लेकिन डॉक्यूमेंट ऑफ़ रेटिफ़िकेशन नहीं जमा कराया जिसके बिना ये कनवेंशन बाध्यकारी नहीं होता. और आपने भारत को इस फ़र्जीवाड़े के बारे में कुछ नहीं बताया।

4. जर्मन सरकार ने लिचटेंस्टेन बैंक के एक कर्मचारी को 47.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देकर साल 2008 की शुरुआत में 1400 नामों का पता लगाया। स्विस बैंकर्स एसोसिएशन और जर्मन सरकार ने बताया कि इस लिस्ट में ज़्यादातर भारतीय अपराधियों के नाम थे।

जर्मनी ने सार्वजनिक तौर पर भारत से इस बारे में जानकारी साझा करने की पेशकश की, वो भी बिना किसी शर्त या खर्च के। लेकिन ना तो सरकार ने इसे स्वीकार किया और ना भाजपा के किसी नेता ने. इसके बाद मैंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया लेकिन मेरे या मेरे साथी याचिकाकर्ताओं को आपकी तरफ़ से कोई मदद नहीं मिली बल्कि अवरोध ही पैदा किए गए. भाजपा के तौर-तरीके भारत के साथ धोखा था।

डॉ वैद्यनाथन की अगुवाई वाली भाजपा का टास्क फ़ोर्स ने अपनी 2009 की रिपोर्ट में कहा था कि जर्मन सरकार से तुरंत संपर्क किया जाना चाहिए लेकिन आपने जिन लोगों को पदों पर तैनात किया है, उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।

5. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2011 को अपना फ़ैसला सुनाया. सभी जानते थे कि फ़ैसला मेरे और मेरे साथियों के पक्ष में आएगा।

6. सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष ने स्विट्ज़रलैंड के वित्त मंत्री को बुलाया और गोपनीय प्रोटोकॉल माना, जिसमें दो ख़तरनाक शर्तें थीं।
A. भारत अतीत नहीं बल्कि भविष्य में जानकारी मांगेगा. मैं समझता हूं कि इसका क्या मतलब है।
B. भारत यूनाइटेड नेशंस कनवेंशन 2004 नहीं बल्कि डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस ट्रीटी इस्तेमाल करेगा।

7. मैंने ये मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया और इसे काफ़ी सुर्खियां मिलीं. तब आपने मुझसे संपर्क किया और वादा किया कि इस पेशकश का फ़ायदा उठाने के लिए साझा कोशिश की जाएगी। आपको मैंने ही बताया था कि ताकतवर अमरीका और दूसरी यूरोपीय सरकारों ने जानकारी हासिल की तथा इस्तेमाल की और फिर अपने ख़ज़ाने भरे लेकिन भारत में किसी ने ऐसा कुछ नहीं किया।

मैंने अपनी नासमझी में ये भी कहा था कि आप देश के अगले प्रधानमंत्री होने चाहिए। आपने इस वादे के बल पर मेरा भरोसा और साथ जीता कि आपका एजेंड़ा विदेशी बैंकों में रखा काला धन है जो आपके चुनावी अभियान का हिस्सा भी था।

8. मैंने आपसे हमेशा कहा था कि इस फ्रॉड से पर्दा हटना चाहिए. डीटीएटी कोई अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ नहीं बल्कि भारतीय आय कर अधिनियम के सेक्शन 90 के तहत आता है। ये अपराधियों पर लागू नहीं होता बल्कि उन ईमानदार करदाताओं पर होता है जिन्हें एक से ज़्यादा मुल्क़ों में अपनी कमाई पर टैक्स देना होता है।

मुझे बताइए प्रधानमंत्री, आपने पद संभालने के बावजूद जर्मन सरकार से वो करने का आग्रह नहीं किया जो उससे दूसरे रईस मुल्कों के लिए किया है। आपको अपने वित्त मंत्री से इस बारे में पूछना चाहिए था. लेकिन आप भी देश से हो रहे धोखे में एक चुप साथी बन गए।

राज्यसभा में एक लिखित जवाब में वित्त मंत्री ने बताया कि वो कई देशों के साथ अमेंडेड डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस ट्रीटी कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के फ़ैसले का पूरा साथ दिया और भारत से धोखा किया।

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TeamDigital