बड़ा फैसला: निजिता का अधिकार है “मौलिक अधिकार”
नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में निजिता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) को मौलिक अधिकार करार दिया है। इस फैसले के बाद देश के किसी भी नागरिक की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी। सुप्रीमकोर्ट के 9 जजों की बेंच से सर्वसम्मति से ये फैसला दिया है।
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केन्द्र सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला आधार योजना के खिलाफ दायर याचिका पर दी है।
निजता के अधिकार का मामला सामने तब आया जब कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकार ने आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया था। याचिका में आधार योजना की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इस फैसले का सोशल नेटवर्क व्हाट्सएप की नई निजता नीति पर भी असर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आधार, पैन, क्रेडिट कार्ड में दी गई जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा। बता दें कि संविधान ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं माना है।
सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. एस. खेहर, न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति आर. के. अग्रवाल, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर वाली संविधान पीठ ने दो सप्ताह की सुनवाई के बाद दो अगस्त को मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इस मामले में केंद्र सरकार ने 1954 में आठ न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले और 1962 में छह न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले का संदर्भ देते हुए कहा है कि निजता का अधिकार मूलभूत अधिकार नहीं है।
केंद्र सरकार का कहना है कि 70 के दशक के मध्य में दो या तीन सदस्यीय पीठ द्वारा दिए गए कई फैसलों में निजता के अधिकार को मूलभूत अधिकार बताया गया था, लेकिन 1954 और 1962 में बड़ी पीठों द्वारा दिए गए फैसले इस मामले का आधार बनते हैं।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित महाराष्ट्र और गुजरात ने जहां निजता के अधिकार को मूल अधिकार नहीं माना है, वहीं कांग्रेस शासित कर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पुदुचेरी और तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल का कहना है कि निजता का अधिकार मूल अधिकार है।
नौ न्यायाधीशों की पीठ द्वारा इस बारे में फैसले के बाद कि निजता का अधिकार मूलाधिकार है या नहीं, एक नियमित पीठ आधार योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई होगी।
