क्रॉस वोटिंग और नोटा का नहीं हुआ इस्तेमाल तो रखी रह जाएगी बीजेपी की रणनीति
नई दिल्ली। गुजरात में कांग्रेस और बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी राज्य सभा सीट पर कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग और नोटा के इस्तेमाल का खतरा नज़र आ रहा है। इस वर्ष के अंत तक गुजरात में होने जा रहे विधानसभा चुनावो के मद्देनज़र दोनो पार्टियों ने राज्य सभा सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।
कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल को यह सीट जीतने के लिए 45 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। जबकि कांग्रेस के पास अभी भी 44 विधायक मौजूद हैं जिन्हे बंगलुरु से लाकर आनंद के एक रिसॉर्ट में रखा गया है।
वहीँ पार्टी छोड़ चुके शंकर सिंह वाघेला जो कि अहमद पटेल के दोस्त भी हैं, उन्होंने अपना वोट अहमद पटेल को देने का एलान किया है। इस तरह कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल की जीत के लिए ज़रूरी 45 वोटों का जुगाड़ तो हो गया है।
वहीँ कांग्रेस को बड़ी राहत देते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने अपने दो विधायकों के समर्थन का एलान किया है। पार्टी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने आज अपनी पार्टी के विधायकों को इस संदर्भ में व्हिप ज़ारी किया है। एनसीपी के समर्थन के बाद कांग्रेस के पास जीत के लिए ज़रूरी 45 विधायकों की जगह विधायकों की तादाद 47 तक हो जाती है।
यदि कांग्रेस या एनसीपी की तरफ से किसी विधायक ने क्रॉस वोटिंग या नोटा का इस्तेमाल नहीं किया तो गुजरात में राज्य सभा सीट जीतने की बीजेपी की रणनीति औंधे मूँह भी गिर सकती है।
हालाँकि कांग्रेस छोड़ चुके शंकर सिंह वाघेला ने भी कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल के समर्थन का एलान किया है लेकिन राजनैतिक दृष्टि से कांग्रेस उनके कहे को विश्वसनीय नहीं मानती। इसलिए कांग्रेस की पूरी नज़र उसके अपने 44 विधायकों और दो एनसीपी विधायकों पर टिकी है।
बीजेपी की तरफ से खतरे को भांपते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को सुरक्षित स्थान पर रखा है। कल इन विधायकों को बस में बैठकर विधानसभा ले जाया जाएगा। अपने विधायकों को लेकर कांग्रेस बेहद फूंक फूंक कर कदम रख रही है। यही कारण है कि रक्षाबंधन के पर्व पर भी कांग्रेस ने अपने विधायकों को उनके घर जाने देने की जगह रिसॉर्ट में ही रखना उचित समझा।
इस बीच आज कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल ने कहा कि उन्हें अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है। वो उन्हें ही वोट करेंगे। उन्होंने कहा कि वो खुद सभी विधायकों से मुलाकात करेंगे।
