गुलबर्ग सोसाइटी मामले में 11 को उम्रकैद, 12 को सात साल की सजा

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अहमदाबाद । एक विशेष एसआइटी अदालत गुलबर्ग सोसाइटी दंगा मामले में 11 दोषियों को शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं 12 दोषियों को 7 साल जबकि एक अन्‍य को 10 साल की सजा सुनाई गई। बता दें कि 2002 के गुजरात दंगों में गुलबर्ग सोसायटी में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

विशेष अदालत के न्यायाधीश पीबी देसाई ने अभियोजन, बचाव पक्ष के साथ-साथ पीड़ितों के वकील ने दलीलें पूरी होने के बाद यहां सोमवार को घोषणा की थी कि सजा शुक्रवार को सुनाई जाएगी। इससे पहले दो जून को अदालत ने हत्या और अन्य अपराधों के लिए 11 लोगों को दोषी ठहराया था जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य सहित 13 अन्य हल्के अपराधों के तहत दोषी ठहराए गए थे। अदालत ने इस मामले में 36 अन्य को बरी कर दिया था।

बड़े अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए लोगों में मुख्य आरोपियों में एक कैलाश धोबी भी शामिल है, जिसने 13 जून को अदालत में आत्मसमर्पण किया जब न्यायाधीश ने सजा सुनाने पर सुनवाई पूरी कर ली। उसे 2002 में गिरफ्तार किया गया था और इस साल फरवरी में अस्थायी जमानत पर रिहा होने के बाद फरार हो गया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआइटी का प्रतिनिधित्व कर रहे लोक अभियोजक आर सी कोडेकर ने अदालत से कहा कि 24 दोषियों को मृत्युदंड या आजीवन कारावास से कम सजा नहीं सुनाई जानी चाहिए। पीड़ितों के वकील एसएम वोरा ने दलील दी कि प्रत्येक अपराध के लिए सजा साथ-साथ नहीं चलनी चाहिए, जिससे वे पूरा जीवन जेल में बिताएं।

आरोपी अजय भारद्वाज के वकील ने मृत्युदंड या अधिकतम सजा की मांगों का अपनी दलीलों में यह कहते हुए विरोध किया घटना स्वत: थी और इसके लिए पर्याप्त उकसावा था। गुलबर्ग सोसाइटी मामला यहां 28 फरवरी 2002 को हुआ था। उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसने पूरे देश को दहला दिया था क्योंकि करीबन 400 लोगों की उग्र भीड़ ने अहमदाबाद के केंद्र में स्थित सोसाइटी पर हमला किया था और जाफरी समेत निवासियों की हत्या कर दी थी।

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