अगर कोर्ट मस्जिद के हक में फैसला सुनाती है तो अयोध्या में मस्जिद का निर्माण किया जाएगा : ओवैसी

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नई दिल्ली । आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसल्मीन (एआईएमआईएम) प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट मस्जिद के हक में फैसला सुनाती है तो अयोध्या की विवादित जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया जाएगा। ओवैसी ने यह बात इंडिया टीवी के मेगा शो संवाद में ‘क्या मुसलमान भारत में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं?’ विषय पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी से बहस के दौरान कही ।

ओवैसी ने यह जबाव भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के उस कथन पर दिया जिसमे उन्होंने कहा कि जुलाई में सुप्रीम कोर्ट में दिन प्रतिदिन की सुनवाई शुरु हो जाएगी और सर्वोच्च अदालत को अपना निर्णय सुनाने में एक महीने से ज्यादा का समय नहीं लगेगा और इस साल ही अयोध्या में विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा ।

कश्मीर के मुद्दे पर स्वामी से सवाल करते हुए ओवैसी ने कहा कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए भाजपा सरकार ने बीते दो सालों में क्या किया है? ओवैसी ने कहा कि भाजपा पीडीपी के साथ जम्मू कश्मीर की सत्ता को साझा कर रही है और उन्हें इस विषय पर विधानसभा में एक प्रस्ताव लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो साल से सत्ता में हैं आप मुझे आंकड़े बताइए कि कितने कश्मीरी पंडितों को अब तक वहां भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा, “आप कश्मीर में भी सत्ता को साझा कर रहे हैं।”

ओवैसी ने भाजपा नेता से कहा कि वो समय सीमा बताएं कि आखिर कब तक भारतीय संविधान की धारा 370 को हटा लिया जाएगा, जिसके कारण राज्य को स्वायतता और विशेष दर्जा मिला हुआ है। उन्होंने कहा, “मैने संविधान विशेषज्ञों से सुना है कि अगर आप कश्मीर को भारत के साथ बनाए रखना चाहते हैं तो धारा 370 जरूरी है। कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।”

ओवैसी ने फिर जम्मू एवं कश्मीर में भाजपा और पीडीपी के गठबंधन वाली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हमें कश्मीरियों से प्रेम करना चाहिए न कि सिर्फ कश्मीरी पंडितों से। काफी सारे कश्मीरी बच्चे अब भी लापता हैं। अगर एक आतंकवादी मारा जाता है तो उसके अंतिम संस्कार में 50,000 लोग जमा होते हैं। आप बताइए मुफ्ती मोहम्मद सईद के अंतिम संस्कार के वक्त कितने लोग मौजूद थे। भाजपा सत्ता में है आप राज्य में किस तरह की सरकार चला रहे हैं।”

वहीं यूनीफॉर्म सिविल कोड पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि इस देश की विविधता को बचाने की जरूरत है वर्ना यह वास्तविकता नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा, “एक विविधतापूर्ण देश की विविधता को बचाइए। मैं समान नागरिक संहिता (यूनीफॉर्म सिविल कोड) के खिलाफ हूं। समान नागरिक संहिता में किसी को भी नहीं लाया जा सकता है।”

ओवैसी ने एनआईए द्वारा साध्वी प्रत्रा को क्लीन चिट दिए जाने के मुद्दे पर जिक्र करते हुए कहा कि आप बताइए कि यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड अल्पसंख्यकों के साथ कैसे भेदभाव किया जाता है। ओवैसी ने कहा कि मुंबई ब्लास्ट के दौरान एक महिला को सिर्फ इसलिए आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई क्योंकि हथियारों से भरकर एक वैन जहां से आई थी वो उससे संबंधित थी। अब एनआईए ने उन साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को क्लीन चिट दे दी है जिनकी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल ब्लास्ट में किया गया था। कहां है यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड? इसका पालन हुआ यहां?

दरसों के मार्डनाइजेशन पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा, “शिक्षा का अधिकार अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होता। क्योंकि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 29 और 30 सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार की गारंटी देता है। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि स्कूल जाने वाले सिर्फ तीन फीसदी मुस्लिम बच्चे ही मदरसों में पढ़ाई करते हैं।”

बीफ विवाद पर ओवैसी ने कहा कि आप महाराष्ट्र में बीफ पर प्रतिबंध लगा रहे हैं लेकिन गोवा में नहीं। क्या यही है सबका साथ सबका विकास? उन्होंने कहा कि बीफ पर प्रतिबंध लगाने से गरीब मुसलमानों का जीवन प्रभावित होता है। ओवैसी ने कहा, “आपने 1.5 करोड़ नौकरियां हर साल देने का वादा किया था, लेकिन आप ऐसा नहीं कर पाए, आप तो 1.5 लाख नौकरियां भी नहीं दे पाए।”

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